वरासत हेतु आवेदन करने की प्रक्रिया राज्य के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया राजस्व विभाग (Tehsil Office) या CSC (Common Service Centre) के माध्यम से ऑनलाइन/ऑफलाइन दोनों तरह से की जा सकती है।
यह आवेदन किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति (जमीन, घर, बैंक खाता आदि) उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है। आइये हम वरासत के आवेदन की पूरी प्रक्रिया जानते है –

🧾 उत्तराधिकार / वरासत हेतु आवेदन प्रक्रिया
🔹 1. आवश्यक दस्तावेज़ क्या है?
आपको आवेदन से पहले नीचे दिए गए दस्तावेज़ों की ज़रूरत होगी:
- मृतक व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)
- वारिसों का पहचान पत्र (आधार कार्ड / पैन कार्ड / वोटर आईडी आदि)
- वारिसों का निवास प्रमाण पत्र
- खतौनी / संपत्ति संबंधित दस्तावेज़ (यदि भूमि का मामला है)
- राशन कार्ड / परिवार रजिस्टर की नकल
- घोषणा पत्र (Affidavit) कि मृतक की अन्य कोई संतान या वारिस नहीं है
- पासपोर्ट साइज फोटो सभी वारिसों की
🔹 2. आवेदन आवेदन की प्रक्रिया –
🖥️ (A) ऑनलाइन आवेदन (उत्तर प्रदेश उदाहरण):

- वेबसाइट खोलें 👉 https://vaad.up.nic.in/
- “सेवाएं” मेनू में जाएँ → “नागरिक प्रमाणपत्र सेवाएं” चुनें।
- “उत्तराधिकार / वरासत हेतु आवेदन (प्रपत्र आर० सी० 9 पूर्व में प क – 11)” विकल्प पर क्लिक करें।
- लॉगिन करें या नया खाता बनाएं।
- राजस्व संहिता की धारा 33(1) के उत्तराधिकार / वरासत हेतु आवेदन (प्रपत्र 9 पूर्व में प क – 11(क)) की प्रविष्टि करे
- ऑनलाइन फॉर्म भरें — मृतक का नाम, मृत्यु तिथि, वारिसों का विवरण आदि।
- फॉर्म सबमिट करें और आवेदन संख्या (Application ID) नोट कर लें।
- आवेदन को प्रिंट करके साथ में सभी सम्पति की एक-एक प्रति लगाकर आपने संबंधित लेखपाल के पास जमा करे।

📜 आवेदन की जाँच तहसील स्तर पर होती है। सत्यापन के बाद उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Varasat Certificate) जारी किया जाता है।
🏢3 . ऑफलाइन आवेदन (तहसील कार्यालय या CSC से):
- अपने तहसील कार्यालय या जनसेवा केंद्र (CSC) पर जाएँ।
- “उत्तराधिकार प्रमाणपत्र हेतु आवेदन पत्र” लें।
- सभी विवरण भरें और दस्तावेज़ संलग्न करें।
- आवेदन तहसीलदार कार्यालय में जमा करें।
- सत्यापन के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
4. समय और शुल्क:
- प्रक्रिया समय: लगभग 15–30 दिन
- शुल्क: ₹50–₹100 (ऑनलाइन
📄 5. प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद उपयोग:
उत्तराधिकार प्रमाणपत्र का उपयोग इन कार्यों में होता है:
- जमीन/संपत्ति का नामांतरण (Mutation)
- बैंक खाता/पेंशन/बीमा क्लेम
- सरकारी रेकॉर्ड में नाम दर्ज कराने हेतु

